द्विघात समीकरण की परिभाषा एवं द्विघात समीकरण के सवाल

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप द्विघात समीकरण की जानकारी पढ़ने वाले हैं तो यदि आप द्विघात समीकरण की जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़िए।

पिछले पेज पर हमने प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन की जानकारी शेयर की हैं तो आप उस आर्टिकल को भी पढ़ सकते हैं। चलिए आज इस पेज पर हम द्विघात समीकरण की जानकारी को पढ़कर समझते हैं।

द्विघात समीकरण किसे कहते हैं

एक द्विघात समीकरण में, एक चर वर्ग में होता है। इस प्रकार के समीकरण को “घात 2 का समीकरण” भी कहा जाता है।
बीजीय व्यंजक ax² + bx + c = 0, (जहाँ a ≠ 0, b, c ∈ R हो) के रूप में होने वाले समीकरण द्विघात समीकरण कहा जाता है।

यह समीकरण ax2 + bx + c = 0, a ≠ 0 द्विघात समीकरण का मानक रूप है। जहाँ a ≠ 0, a, b और c अचर राशियाँ है।

  • ax2 = द्विघात पद (Quadratic Term)
  • a = x2 का गुणांक (Coefficient of x2)
  • bx रैखिक पद (Linear Term)
  • b – x का गुणांक (Coefficient of x)
  • c अचर पद (Constant Term)

यदि α समीकरण ax2 + bx + c = 0 के वास्तविक मूल हो, तो द्विघात समीकरण को इस प्रकार aα2 + bα + c = 0 लिखा जाता है।

द्विघात समीकरण को हल करने की विधि

अचर वाले द्विघात समीकरण के दो हल होते है, जिन्हें प्रायः α (अल्फा), β (बीटा) से व्यक्त किया जाता है।

द्विघात समीकरण को मुख्यतः तीन प्रकार से हल किया जाता है जो इस प्रकार है।

  1. गुणनखंड विधि (Factorisation Method)
  2. पूर्ण वर्ग बनाकर (Completing the Square)
  3. श्रीधरोचार्य विधि (Sridharocharya Method)

1. गुणनखंड विधि

x2 + x – 110 = 0 का मूल निकाले?

हल: x2 + 11x – 10x – 110 = 0
⇒ x (x + 11) – 10 (x + 11) = 0
⇒ (x + 11) (x – 10) = 0
x + 11 = 0
x = – 11
x – 10 = 0
x = 10
x = 10, -11

2. पूर्ण वर्ग विधि

ax² + bx + c = 0
a ≠ 0
x = -b ± √(b² – 4ac)/2a
ax² + bx + c = 0
दोनों पक्षों में a से भाग करने पर,
ax²/a + bx/a + c/a = 0
x² + b/a x + c/a = 0
x² + b/a x = − c/a
दोनों पक्षों में b²/4a² जोड़ने पर,
x² + b/a x + b²/4a² = b²/4a² − c/a
(x + b/2a)² = (b² – 4ac)/4a²
(x + b/2a) = ± √(b² – 4ac)/√4a²
x = -b/2a ± √(b² – 4ac)/2a
x = -b ± √(b² – 4ac)/2a

3. श्रीधरोचार्य विधि

ax2 + bx + c = 0 के मूल α (अल्फा), β (बीटा) हो, तो

(α, β) =  – b ± √D/2a

α = – b + √(b2 – 4ac) / 2a
β = – b – √(b2 – 4ac) / 2a

जहाँ D = विवेचक (विवित्कर, Discriminant) विधि कहते है इसे Depics विधि भी कहा जाता है।

जिसमे D = b2 – 4ac होता है।

मूलों की प्रकृति (Roots of Nature)

समीकरण ax2 + bx + c = 0 के लिये b2 − 4ac > 0 हो, तो समीकरण के मूल वास्तविक और असमान होता है।

द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के लिये b2 − 4ac = 0 हो, तो मूल वास्तविक और सामान होता है।

द्विघात समीकरण के सूत्र एवं परिणाम

समीकरण ax2 + bx + c = 0 का यदि विविक्तकर (Discriminant) b2 − 4ac > 0 हो, तो समीकरण के दो भिन्न वास्तविक मूल होते हैं।

  • समीकरण b2 − 4ac = 0 हो, तो मूल वास्तविक और सामान होगा।
  • b2 − 4ac < 0 हो, तो मूल काल्पनिक होगा।
  • b2 − 4ac > 0 हो, तो मूल वास्तविक और असमान होगा।
  • मूलों का योगफल (α + β) = – b/a
    = – x का गुणांक / (x2 का गुणांक)
  • मूलों का गुणनफल (α . β) = c/a
    = अचर / (x2 का गुणांक)

द्विघात समीकरण x2 – (α + β) x + (α . β) = 0 होता है। जब, D = 0 हो, तो α = β = – b / a होता है।

ax2 + bx + c = 0 में जब a + b + c = 1 हो, तो इसका एक मूल 1 अवश्य होता है।

द्विघात समीकरण x2 – (α + β) x + (α . β) = 0 होता है। जब, D = 0 हो, तो α = β = – b / a होता है।

ax2 + bx + c = 0 में जब a + b + c = 1 हो, तो इसका एक मूल 1 अवश्य होता है।

द्विघात समीकरण के सवाल

प्रश्न 1. जाँच कीजिए कि क्या निम्न द्विघात समीकरण हैं?

(i). (x + 1)2 = 2 (x – 3)

हल:- प्रश्नानुसार,
(x + 1)2 = 2 (x – 3)
⇒ x2 + 2x + 1 = 2x – 6
⇒ x2 + 0x + 7 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण ax2 + bx + c = 0 प्रकार का है, जहाँ a, b एवं c वास्तविक संख्याएँ हैं तथा a ≠ 0
अत: दत्त समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

(ii). x2 – 2x = (-2) (3 – x)

हल:- प्रश्नानुसार,
x2 – 2x = (-2) (3 – x)
⇒ x2 – 2x = -6 + 2x
⇒ x2 – 4x + 6 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण ax2 + bx + c = 0 प्रकार का है, जहाँ a ≠ 0 तथा a, b और c वास्तविक संख्याएँ हैं।
अत: दत्त समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

(iii). (x – 2) (x + 1) = (x – 1) (x + 3)

हल:- प्रश्नानुसार,
(x – 2) (x + 1) = (x – 1) (x + 3)
⇒ x2 – 2x + x – 2 = x2 – x + 3x – 3
⇒ x2 – 2 = x2 + 2x – 3
⇒ 3x – 1 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण ax2 + bx + c = 0 प्रकार का नहीं हैं क्योंकि यहाँ a = 0 है। यह रैखिक समीकरण है।
अतः दत्त समीकरण एक द्विघात समीकरण नहीं है।

(iv). (x – 3) (2x + 1) = x (x + 5)

हल:- प्रश्नानुसार,
(x – 3) (2x + 1) = x (x + 5)
⇒ 2x2 + x – 6x – 3 = x2 + 5x
⇒ x2 – 10x – 3 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण ax2 + bx + c = 0 प्रकार का है, जहाँ a, b और c वास्तविक संख्याएँ हैं और a ≠ 0. अतः दत्त समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

(v). (2x – 1) (x – 3) = (x + 5) (x – 1)

हल:- प्रश्नानुसार,
(2x – 1)(x – 3) = (x + 5) (x – 1)
⇒ 2x2 – 6x – x + 3 = x2 – x + 5x – 5
⇒ x2 – 11x + 8 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण ax2 + bx + c = 0 प्रकार का है, जहाँ a, b और c वास्तविक संख्याएँ हैं और a ≠ 0 अतः उक्त समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

(vi). x2 + 3x + 1 = (x – 2)2

हल:- प्रश्नानुसार,
x2 + 3x + 1 = (x – 2)2
⇒ x2 + 3x + 1 = x2 – 4x + 4
⇒ 7x – 3 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण ax2 + bx + c = 0 प्रकार का नहीं है, क्योंकि यहाँ a = 0 है। यह एक रैखिक समीकरण है। अतः दत्त समीकरण एक द्विघात समीकरण नहीं है।

(vii). (x + 2)3 = 2r (x2 – 1)

हल:- प्रश्नानुसार,
(x + 2)3 = 2x (x2 – 1)
⇒ x3 + 6x2 + 12x + 8 = 2x3 – 2x
⇒ x3 – 6x2 – 14x – 8 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण त्रिघात समीकरण है।
अतः दत्त समीकरण द्विघात समीकरण नहीं हैं।

(viii). x3 – 4x2 – x + 1 = (x – 2)3

हल:- प्रश्नानुसार,
x3 – 4x2 – x + 1 = (x – 2)3
⇒ x3 – 4x2 – x + 1
⇒ x3 – 6x2 + 12x – 8
⇒ 2x2 – 13x + 9 = 0
चूँकि उपरोक्त समीकरण ax2 + bx + c = 0 प्रकार का है, जहाँ a, b और c वास्तविक संख्याएँ हैं और a ≠ 0.
अतः दत्त समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

प्रश्न 2. निम्न स्थितियों को द्विधात समीकरणों के रूप में निरूपित कीजिए?

(i). एक आयताकार भू-खण्ड का क्षेत्रफल 528 m2 है। क्षेत्र की लम्बाई (मीटरों में) चौड़ाई के दुगने से एक अधिक है। हमें भू-खण्ड की लम्बाई और चौड़ाई ज्ञात करना है।

हल:- माना,
आयताकार भू-खण्ड की चौड़ाई है x मीटर है।
तो प्रश्नानुसार,
लम्बाई = 2 × चौड़ाई + 1
= 2x + 1
तथा क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
⇒ (2x + 1) × (x) = 528
⇒ 2x2 + x = 528
⇒ 2x2 + x – 528 = 0
अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण 2x2 + x – 528 = 0 है, जहाँ x आयताकार भू-खण्ड की चौड़ाई (मीटरों में) है।

(ii). दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांकों का गुणनफल 306 है। हमें पूर्णांकों को ज्ञात करना है।

हल :- माना, दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांक क्रमशः x और x + 1 हैं।
तो प्रश्नानुसार,
x (x + 1) = 306
⇒ x2 + x = 306
⇒ x2 + x – 306 = 0
अत: अभीष्ट द्विघात समीकरण x2 + x – 306 = 0 है, जहाँ x एक धनात्मक पूर्णांक है।

(iii). रोहन की माँ उससे 26 साल बड़ी है। उनकी आयु (वर्षों में) का गुणनफल अब से तीन वर्ष पश्चात् 360 हो जाएगा। हमें रोहन की वर्तमान आयु ज्ञात करनी है।

हल :- माना कि,
रोहन की वर्तमान आयु x वर्ष है।
तो प्रश्नानुसार,
उसकी माँ की वर्तमान आयु = x + 26 वर्ष
एवं (x + 3) (x + 26 + 3) = 360
⇒ (x + 3) (x + 29) = 360
⇒ x2 + 29x + 3x + 87 = 360
⇒ x2 + 32x + 87 – 360 = 0
⇒ x2 + 32x – 273 = 0
अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण x2 + 32x – 273 = 0 है, जहाँ x = रोहन की वर्तमान आयु (वर्षों में)

(iv). एक रेलगाड़ी 480 km की दूरी समान चाल से तय करती है। यदि इसकी चाल 8 km/hr कम होती तो वह उसी दूरी को तय करने में 3 घण्टे अधिक लेती। हमें रेलगाड़ी की चाल ज्ञात करनी है।

हल :- माना कि,
रेलगाड़ी की चाल x km/hr है।
तो प्रश्नानुसार,
480 km दूरी तय करने में लगा समय = 480𝑥 घण्टे
एवं 480𝑥 − 8 = 480𝑥 + 3
⇒ 160𝑥−8 – 160𝑥 = 1
⇒ 160x – 160x + 1280 = x (x – 8)
⇒ x2 – 8x – 1280 = 0
अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण x2 – 8x – 1280 = 0 है, जहाँ x रेलगाड़ी की चाल km/hr में है।

प्रश्न 3. गुणनखण्ड विधि से निम्न द्विघात समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए?

(i). x2 – 3x – 10 = 0

हल:- प्रश्नानुसार,
x2 – 3x – 10 = 0
⇒ x – 5x + 2x – 10 = 0
⇒ x (x – 5) + 2 (x – 5) = 0
⇒ (x – 5) (x + 2) = 0
या तो x – 5 = 0 ⇒ x = 5
अथवा x + 2 = 0 ⇒ x = -2
अत: दत्त समीकरण के अभीष्ट मूल 5 एवं -2 हैं।

(ii). 2x2 + x – 6 = 0

हल:- प्रश्नानुसार,
2x2 + x – 6 = 0
⇒ 2x2 + 4x – 3x – 6 = 0
⇒ 2x (x + 2)- 3 (x + 2) = 0
⇒ (x + 2) (2x – 3) = 0
या तो x + 2 = 0 ⇒ x = -2
अथवा 2x – 3 = 0 ⇒ x = 3/2
अतः दत्त समीकरण के अभीष्ट मूल – 2 एवं 3/2 हैं।

(iii). √2x2 + 7x + 5√2 = 0

हल:- प्रश्नानुसार,
√2x2 + 7x + 5√2 = 0
⇒ √2x2 + 5x + 2x + 5√2 = 0
⇒ x(√2x + 5) + √2 (√2x + 5) = 0
⇒ (√2x + 5) (x + √2) = 0
या तो √2x + 5 = 0
⇒ x = −5/√2
अथवा x + √ 2 = 0
⇒ x = – √2
अतः दत्त समीकरण के अभीष्ट मूल − 5/√2 एवं – √2

(iv). 2x2 – x + 18 = 0

हल:- प्रश्नानुसार,
2 – x + 18 = 0
⇒ 16x2 – 4x – 4x + 1 = 0
⇒ 16x2 – 4x – 4x + 1 = 0
⇒ 4x(4x – 1) – 1 (4x – 1) = 0
⇒ (4x – 1) (4x – 1) = 0
⇒ (4x – 1)2 = 0
⇒ 4x – 1 = 0
⇒ 4x = 1
⇒ x = 1/4
अत: दत्त समीकरण के अभीष्ट मूल 1/4 एवं 1/4 हैं।

(v). 100x2 – 20x + 1 = 0

हल :- प्रश्नानुसार,
100x2 – 20x + 1 = 0
⇒ 100x2 – 10x – 10x + 1 = 0
⇒ 10x (10x – 1)- 1 (10x – 1) = 0
⇒ (10x – 1) (10x – 1) = 0
⇒ (10x – 1)2 = 0
⇒ 10x – 1 = 0
⇒ 10x = 1
⇒ x = 1/10
अतः दत्त समीकरण के अभीष्ट मूल 1/10 एवं 1/10 हैं।

प्रश्न 4. जॉन और जीवन्ती दोनों के पास कुल 45 कंचे हैं। दोनों पाँच-पाँच कंचे खो देते हैं और अब उनके पास कंचों की संख्या का गुणनफल 124 है। बताइए आरम्भ में उनके पास कितने-कितने कंचे थे?

हल:- मान लीजिए,
जॉन के पास प्रारम्भ में x कंचे थे तो जीवन्ती के पास प्रारम्भिक कंचों की संख्या = 45 – x
पाँच-पाँच कंचे खोने के बाद दोनों के पास शेष बचे कंचों की संख्या क्रमशः (x – 5) एवं (40 – X) हुई।
प्रश्नानुसार, (x – 5) (40 – x) = 124
⇒ 40x – x2 – 200 + 5x = 124
⇒ x2 – 45x + 324 = 0
⇒ x2 – 9x – 36x + 324 = 0
⇒ x (x – 9) – 36 (x – 9) = 0
⇒ (x – 9) (x – 36) = 0
या तो x – 9 = 0
⇒ x = 9
अथवा x – 36 = 0
⇒ x = 36
चूँकि 9 और 36 का योग 45 और गुणनफल 324 है।
अतः उनके पास अभीष्ट 9 और 36 कंचे थे।

प्रश्न 5. एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ खिलौने निर्मित करता है। प्रत्येक खिलौने का मूल्य (₹ में) 55 में से एक दिन में निर्माण किए गए खिलौनों की संख्या को घटाने से प्राप्त संख्या के बराबर है। किसी एक दिन कुल निर्माण लागत ₹ 750 थी। उस दिन निर्माण किए गए खिलौने की संख्या ज्ञात कीजिए।

हल :- प्रश्नानुसार,
मान लीजिए किसी दिन निर्मित खिलौनों की संख्या : है।
इसलिए प्रश्नानुसार प्रत्येक खिलौने का मूल्य = ₹ (55 – x)
खिलौनों का कुल मूल्य x (55 – x) = 750
⇒ 55x – x2 = 750
⇒ x2 – 55x + 750 = 0
⇒ x2 – 25x – 30x + 750 = 0
⇒ x (x – 25) – 30 (x – 25) = 0
⇒ (x – 25) (x – 30) = 0
या तो x – 25 = 0
⇒ x = 25
अथवा x – 30 = 0
⇒ x = 30
अतः उस दिन निर्मित खिलौनों की संख्या या तो 25 अथवा 30 है।

प्रश्न 6. ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनका योग 27 और गुणनफल 182 हो।

हल:- मान लीजिए एक संख्या x है,
तो दूसरी संख्या 27 – x होगी (चूँकि योग 27 दिया है)
अब प्रश्नानुसार,
x (27 – x) = 182
⇒ 27x – x2 = 182
⇒ x2 – 27x + 182 = 0
⇒ x2 – 13x – 14x + 182 = 0
⇒ x (x – 13) – 14 (x – 13) = 0
⇒ (x – 13) (x – 14) = 0
या तो x – 13 = 0 ⇒ x = 13
अथवा x – 14 = 0 ⇒ x = 14
चूँकि 13 और 14 का योग 27 और गुणनफल 182 है।
अतः अभीष्ट संख्याएँ 13 एवं 14 हैं।

प्रश्न 7. दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांक ज्ञात कीजिए जिनके वर्गों का योग 365 है।
हल:- मान लीजिए दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांक x एवं x + 1 हैं,
तो प्रश्नानुसार,
(x + 1)2 + (x)2 = 365
⇒ x2 + 2x + 1 + x2 = 365
⇒ 2x2 + 2x – 364 = 0
⇒ x2 + x – 182 = 0
⇒ x2 + 14x – 13x – 182 = 0
⇒ x (x + 14) – 13 (x + 14) = 0
⇒ (x + 14) (x – 13) = 0
या तो x + 14 = 0 ⇒ x = – 14 (जो धनात्मक नहीं हैं)
अथवा x – 13 = 0 ⇒ x = 13
अतः अभीष्ट धनात्मक पूर्णांक 13 एवं 14 हैं।

प्रश्न 8. एक समकोण त्रिभुज की ऊँचाई उसके आधार से 7 cm कम है। यदि कर्ण 13 cm का हो, तो अन्य दो भुजाएँ ज्ञात कीजिए।

हल:- मान लीजिए
समकोण त्रिभुज का आधार x cm है।
तो त्रिभुज की ऊँचाई = (x – 7) cm
प्रश्नानुसार,
(आधार)2 + (ऊँचाई)2 = (कर्ण)2 (पाइथागोरस प्रमेय से)
⇒ (x)2 + (x – 7)2 = (13)2 (∵ कर्ण = 17 cm दिया है)
⇒ x2 + x2 – 14x + 49 = 169
⇒ 2x2 – 14x – 120 = 0
⇒ x2 – 7x – 60 = 0
⇒ x2 – 12x + 5x – 60 = 0
⇒ x(x – 12) + 5 (x – 12) = 0
⇒ (x – 12) (x + 5) = 0
या तो x + 5 = 0 ⇒ x = -5 (जो असम्भव है)
अथवा x – 12 = 0 ⇒ x = 12 cm
⇒ ऊँचाई = x = 12 – 7 = 5 cm
अतः समकोण त्रिभुज का आधार = 12 cm तथा ऊँचाई = 5 cm है।

प्रश्न 9. एक समकोण त्रिभुज की ऊँचाई उसके आधार से 7 cm कम है। यदि कर्ण 13 cm का हो, तो अन्य दो भुजाएँ ज्ञात कीजिए।

हल:- मान लीजिए समकोण त्रिभुज का आधार x cm है, तो त्रिभुज की ऊँचाई = (x – 7) cm
प्रश्नानुसार,
(आधार)2 + (ऊँचाई)2 = (कर्ण)2 (पाइथागोरस प्रमेय से)
⇒ (x)2 + (x – 7)2 = (13)2 (∵ कर्ण = 17 cm दिया है)
⇒ x2 + x2 – 14x + 49 = 169
⇒ 2x2 – 14x – 120 = 0
⇒ x2 – 7x – 60 = 0
⇒ x2 – 12x + 5x – 60 = 0
⇒ x(x – 12) + 5 (x – 12) = 0
⇒ (x – 12) (x + 5) = 0
या तो x + 5 = 0 ⇒ x = -5 (जो असम्भव है)
अथवा x – 12 = 0 ⇒ x = 12 cm
⇒ ऊँचाई = x = 12 – 7 = 5 cm
अतः समकोण त्रिभुज का आधार = 12 cm तथा ऊँचाई = 5 cm है।

प्रश्न 10. एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ बर्तनों का निर्माण करता है। एक विशेष दिन यह देखा गया कि प्रत्येक नग की निर्माण लागत (₹ में) उस दिन के निर्माण किए गए बर्तनों की संख्या के दुगने से 3 अधिक थी। यदि उस दिन की कुल निर्माण लागत ₹ 90 थी, तो निर्मित बर्तनों की संख्या और प्रत्येक नग की लागत ज्ञात कीजिए।

हल:- माना विशेष दिन निर्मित बर्तनों की संख्या x है,
तो प्रत्येक बर्तन की लागत = (2x + 3),
प्रश्नानुसार,
अब कुल लागत = लागत दर × बर्तनों की संख्या
⇒ (2x + 3) × x = 90
⇒ 2x2 + 3x = 90
⇒ 2x2 + 3x – 90 = 0
⇒ 2x2 + 15x – 12x – 90 = 0
⇒ x (2x + 15) – 6(2x + 15) = 0
⇒ (2x + 15) (x – 6) = 0
या तो 2x + 15 = 0
⇒ x = −152 (जो असम्भव है)
अथवा x – 6 = 0
⇒ x = 6
प्रति बर्तन लागत = 2x + 3
= 2 × 6 + 3
= 12 + 3 = 15
अत: निर्मित बर्तनों की अभीष्ट संख्या = 6 तथा प्रत्येक बर्तन की लागत = ₹ 15 है।

FAQ

द्विघात समीकरण से आप क्या समझते हैं?

Ans. जब हम p(x) के पद घातों के घटते क्रम में लिखते हैं, तो हमें समीकरण का मानक रूप प्राप्त होता है। अर्थात् ax²+ bx + c = 0, a ≠ 0, द्विघात समीकरण का मानक रूप कहलाता है ।

Q.2 द्विघात समीकरण को कैसे समझें?


Ans. पहले हम समीकरण को ax² + bx + c = 0 के रूप में लाते हैं जहाँ a, b और c गुणांक हैं। उसके बाद हम इन गुणांकों को सूत्र में प्रतिस्थापित करते हैं। (-b ± √(b² – 4ac))/(2a)

Q.3 द्विघात समीकरण कितने प्रकार के होते हैं?

Ans. द्विघात समीकरण दो प्रकार के होते हैं।

1. शुद्व द्विघात समीकरण
2. मिश्रित द्विघात समीकरण

Q.4 द्विघात समीकरण का दूसरा नाम क्या है?

 Ans. बहुपद समीकरण

Q.5 द्विघात समीकरण कौन सा है?


Ans. द्विघात समीकरण एक दूसरे क्रम का समीकरण है जिसे ax 2 + bx + c = 0 के रूप में लिखा जाता है जहां a, b, और c वास्तविक संख्याओं के गुणांक हैं और a ≠ 0 है।

उम्मीद हैं आपको द्विघात समीकरण की जानकारी पसंद आयी होगी। यदि आपको यह जानकारी पसंद आयी हो तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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